पृथ्वी की उत्पत्ति और विकास

***Prithvi ki Utpatti Aur Vikas***

हमारी पृथ्वी…हमरा घर जिसमे हमरा जन्म हुआ जहा हम रहते है ब्रम्हांड का वह अकेला नीला ग्रह जंहा जीवन मौजूद है हमारी पृथ्वी की आयु लगभग 4.543E9 वर्ष है  हमारी पृथ्वी… जिसकी सुंदरता की कोई तुलना नहीं है यहां बड़े पर्वतों के साथ-साथ गहरे समंदर भी है सांफ ऑक्सीजन से भरपूर हवा के साथ-साथ कई जीवन के मूल-भुत आधार है धरती के निचे मूल्यवान खनिज है यहाँ वह सबकुछ जो जीवन के लिए जरुरी है इन सब के कारण आज  पृथ्वी पर जटिल जीवन पनप रहा है ब्रम्हांड में हमारी पृथ्वी के अलावा कई ग्रह है परन्तु वहा जीवन नहीं है| ना ही पृथ्वी के समान जीवन के लिए अनुकूलित है prithvi-ki-utpatti-aur-vikas

EARTH

पृथ्वी अपने निर्माण के बाद कई घटनाओं की साक्षी रही है जैसे कि इंसानों का पृथ्वी पर पहला कदम और उन्नति, टेक्टोनिक,अद्भुत निर्मान, धरती के प्लेटो का एक-दूसरे से टकराने से पर्वतों और समुद्रो का निर्माण, डायनासोर का पृथ्वी पर राज और उनका अनंत, समुद्रो में विभिन प्रजातियों का विकास,मनुष्य का विभिन क्षेत्रों में नए नए खोज, अनसुलझे रहस्यों को सुलझाना आदि |एक आग के गोले से लेकर आज की खुबसुरत पृथ्वी तक का सफर इतना आसन नहीं था | पृथ्वी के बारे में और जानने के लिए हमें समय में थोड़ा पीछे जाना होगा

ब्रह्मांड की उत्पत्ति कैसे हुई?

आज से लगभग 13.8 अरब साल पहले इस समय ना तो पृथ्वी थी ना सूरज था ना कोई ग्रह था| आरम्भ में वे सभी पादर्थ जिनसे ब्रम्हांड बना हुआ है (एकाकी परमाणु) के रूप में एक ही स्थान पर स्थित थे जिसका आयतन अत्यधिक सुक्छ्म एवं तापमान और घनत्व अनंत था एक समय बाद इस गोले में भीषण विस्फोट हुआ  जिससे ब्रम्हांड का जन्म हुआ इस घटना को the big bang कहा जाता है इस घटना के बाद ब्रम्हांड का विस्तार होने लगा जो आज भी जरी है prithvi-ki-utpatti-aur-vikas

BIG-BANG

तारो और आकाशगंगा का निर्माण

5 से 6 अरब वर्ष पहले ग्रुत्वकर्षण के कारण हाइड्रोजन गैस से बने बादल और धुल एकजुट होकर बादलो का एक बड़ा झुण्ड बने जिसे निहारिका(NEBULA) कहते है ये झुण्ड बढ़ते बढ़ते घने तारो का निर्माण करने लगे जिसे आकाशगंगाओ का जन्म हुआ| तारो के  एक बड़े समूह को आकाशगंगा कहते है | आकाशगंगाओ का विस्तार इतना अधिक होता है की उनकी दुरी को हजारो प्रकाश वर्षो(light years) में मापी जाती है एक अकेले आकाशगंगा का व्यस लगभग 80 हजार से 1 लाख 50 हजार प्रकाश वर्ष के बिच होता है हमरा सौर मण्डल भी एक आकाशगंगा में ही है जिसे मंदाकनी(The Milky Way) कहते है|

पृथ्वी की उत्पत्ति कैसे हुई

बिग बेंग से निकलने वाले  पादर्थ अंतरीक्ष चारो तरफ बिखरे हुए थे जो ग्रुत्वकर्षण के कारण आपस में जुड़ने लगा जिनसे सभी ग्रहों का जन्म हुआ जिसमे से एक हामरी पृथ्वी थी| पृथवी जन्म के बाद एक आग के गोले के रूप में थी जिसका तापमान लगभग 1200.C था इसके चारो तरफ खोलते लावा के समुद्र थे  इसी समय एक थिया नाम का एक ग्रह जिसका आकार मंगल ग्रह के समान था 15किलोमीटर प्रति सेकेण्ड की रफ्तार से आकर पृथ्वी से टकराया ,दोनों ग्रहो के आपस में जुड़ने से पृथ्वी का आकार बड़ा हुआ | थिया ग्रह जब पृथ्वी से टकराया उस समय पृथ्वी का एक छोटा सा हिसा अलग होकर पृथ्वी के चारो ओर घुमने लगा जो आज पृथ्वी का अकेला प्रकृतिक उपग्रह हमरा चाँद है |YouTube

earth and moon

अब पृथ्वी का आकार बढ़ चूका था जिसके साथ उसका गुरुत्वाकर्षण बल भी बढ़ा जिसके कारण पृथ्वी अपने आस-पास के (ASTEROIDS)उल्का पिंड को अपने ओर आकर्षित करने लगे जिसे पृथ्वी पर उल्का पिंडो की बारिश asteroid bombardment होने लगी जिसे एक बार फिर पृथ्वी का तापमान बढ़ा और ताप-मान बढ़ने से निकलने वाली गेसो ने पृथ्वी के चारो ओर वायुमंडल(ATMOSPHERE)का निर्माण किया लेकिन अभी भी पृथ्वी जीवन के लिए अंकुल नहीं था prithvi-ki-utpatti-aur-vikas

समय बिता गया उल्का पिंडो की बारिश बंद हुई और पृथ्वी का ताप-मान भी गिरने लगा और पूरी पृथ्वी बर्फ से जम गई जिसे ice age कहते है  करोडो सालो तक बर्फ के नीचे ढके जव्लामुखी फटने लगे जव्लामुखी से निकलने वाली गर्म गेसो ने बर्फ को पिघलाने का काम किया वायुमंडल ठण्डा होकर बरसने लगे सालो तक वर्षा होती रही जिसे बड़े बड़े महासागरो का निर्माण हुआ और पृथ्वी जलमग्न हो गई

पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति

आब पृथ्वी के चारो तरफ पानी ही पानी था | समुद्र के नीचे सूछ्म जीव (एक कोशीय जीवाणु) पनपने लगे जो  photosynthetic bacteria प्रकाश संश्लेषण के द्वरा औक्सीजन का निर्माण करने लगे | औक्सीजन की मात्रा बढ़ने से पृथ्वी के चारो ओर वायुमंडल में ओजोन लेयर का निर्माण किया | धीरे धीरे अन्य जीवो का विकास हुआ और  पृथ्वी पर पेड़-पौधे फलने फूलने लगा  और जंगलो का निर्माण होने लगा, TETRAPODS जेसे जीवो का विकास हुआ जो पानी से निकल कर जमीन में रहने लगे इनसे आगे चलकर और कई जीवो का जन्म हुआ| जो बाद में डायनासोर बने | इनमे कुछ शांत सवभाव के थे और कुछ हिंसक थे| 14करोड़ सालो तक डायनासोर ने पृथ्वी पर राज किया |

TETRAPODS

डायनासोर का अंत

आज से लगभग 6.6 करोड़ साल पहले सभी जीव धरती पर अपना जीवन बिता रहे थे| उस वक्त एक egypta नाम का बड़ा सा उल्का पिंड, जो 17 हजार किलोमीटर  प्रति घंटा के रफ्तार से धरती से आकर टकराया जिसे एक भयंकर विस्फोट हुआ, जिस जगह यह पिंड आकर गिरा (वर्तमान में मेक्सिको)  वहा की धरती टूट कर आसमान में उपर चली गई, जब यह नीचे धरती में गिरने लगे तो इनसे भीषण तबाही हुई | जिसे धरती में एक बड़ा भूकंम्प आया, भूकम के कारन समुद्रो की लहरे सुनामी का रूप ले लिया,पृथ्वी के नीचे स्थित ज्वलामुखी फटने लगा, इनसे निकलने वाली जहरीली गैस वायुमंडल में जाकर फैल गई ,  जिसे डायनासोर के साथ बहुत से जीवो का अंत हो गया | लेकिन धरती के अन्दर रहने वाले कुछ जीव (MAMMALS)स्तनधारीजीव इस भयंकर विनाश से बचगए |

dinosaur

पृथ्वी पर मनुष्य का जन्म

आज से लगभग 53.5 लाख साल पहले अफ्रीका के जंगलो में पेड़ो पर ardipithecus ramidus नाम के बंदर रहते थे जिन्हें Apesकहते है

Apes

ये हमरे पूर्वज थे..|समय के साथ यह पेड़ो से उतरकर जमीन में रहने लगे, हजारो सालो के विकास के बाद ये अपने दोनों पेरो से चलना सिख गए थे, जिसे उनका उर्जा बचता था और ये खाते खाते भी चल सकते थे और इनका दिमाक भी तेजी से विकसित हो रहा था| समय के साथ विकाश भी चल रहा था समय के साथ साथ इन्हों ने शिकार करना पत्थरो से औजार बनाना सिखा prithvi-ki-utpatti-aur-vikas

जैसे जैसे  समय बीत रहा था इनके सोचने समझने की शक्ति भी बढ़ रही थी इन्होने आग के ऊपर भी काबू पा लिया जो हमरे पूर्वजो के लिए बहुत बड़ी खोज थी|  इसे वे ठंड और अंधकार का सामना कर सकते थे | ये लोग एक – दुसरे से  बात करने के लिए अलग – अलग तरह के आवज निकलते थे , जिसे इन्होने भाषा का विकास किया समय बिता गया और हमरे पूर्वजो का विकास होता गया जो अंत में जाकर  homo sapiens आज के युग के मानव बने|

homo sapiens

धीरे धीरे homo sapiens  अफ्रीका से निकल कर दुसरे स्थानों में पहुचने लगे और पूरी पृथ्वी में अपना आवास बना लिया समय के साथ नए नए सभ्यता का विकास हुआ जिसके साथ मनुष्य का मान्सिक विकास होता रहा | आज मनुष्य इतना उनती कर चूका है जिसे वे आज चाँद और दुसरे ग्रहों में जा सकता है आज मनुष्य मंगल ग्रह पर अपने घर बनाने में लगा है , आज मनुष्य अपने मस्तिस्क का जादा से जादा इस्तमाल करना चाहता है | नए नए खोज करना चाहता है

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